किताबुत-तौहीद
लेखक: शैख़ मुहम्मद इब्न अब्दुल-वह्हाब
तौहीद (अल्लाह की एकेश्वरता)
अल्लाह तआला ने फ़रमाया:
“और मैंने जिन्नों और इंसानों को केवल इसलिए पैदा किया है कि वे केवल मेरी इबादत करें।”
(51:56)
और अल्लाह ने फ़रमाया:
“और निश्चय ही हमने हर उम्मत में एक रसूल भेजा, यह संदेश देकर कि ‘अल्लाह की इबादत करो और ताग़ूत से बचो।’ अर्थात् अल्लाह के अतिरिक्त किसी झूठे माबूद की इबादत न करो।”
(16:36)
और अल्लाह ने फ़रमाया:
“और अल्लाह की इबादत करो और उसके साथ किसी को साझी न ठहराओ।”
(4:36)
और अल्लाह ने फ़रमाया:
“और तुम्हारे रब ने फ़ैसला कर दिया है कि तुम उसके सिवा किसी की इबादत न करो।”
(17:23)
अल्लाह, जो सबसे बुलंद है, ने फ़रमाया:
“जो लोग ईमान लाए और अपने ईमान में ज़ुल्म (अर्थात् अल्लाह के अतिरिक्त किसी की इबादत करके शिर्क) की मिलावट नहीं की, उन्हीं के लिए अमन है और वही हिदायत पाने वाले हैं।”
(6:82)
अल्लाह के रसूल ﷺ ने फ़रमाया:
“जो व्यक्ति इस बात की गवाही दे कि अल्लाह के सिवा कोई सच्चा माबूद नहीं, वह अकेला है और उसका कोई साझी नहीं; और मुहम्मद उसके बंदे और रसूल हैं; तथा ईसा अल्लाह के बंदे, उसके रसूल और उसका वह कलिमा हैं जिसे उसने मरयम तक पहुँचाया, और उसकी ओर से पैदा की गई एक रूह हैं; और यह कि जन्नत और जहन्नम सत्य हैं—तो अल्लाह उसे जन्नत में दाख़िल करेगा, चाहे उसके अमल जैसे भी हों।”
(सहीह अल-बुख़ारी, हदीस संख्या 3252)
नबी ﷺ ने फ़रमाया:
“निश्चय ही अल्लाह ने उस व्यक्ति पर जहन्नम को हराम कर दिया है जो यह गवाही दे कि अल्लाह के सिवा कोई सच्चा माबूद नहीं, और ऐसा केवल अल्लाह की प्रसन्नता प्राप्त करने के लिए करे।”
(अल-बुख़ारी, मुस्लिम)
इमाम अत-तिर्मिज़ी ने अनस رضي الله عنه से रिवायत किया कि उन्होंने अल्लाह के रसूल ﷺ को यह कहते हुए सुना:
“अल्लाह तआला ने फ़रमाया: ‘ऐ आदम के बेटे! यदि तू मेरे पास धरती भर गुनाह लेकर आए, फिर मुझसे इस हाल में मिले कि तूने मेरे साथ किसी को साझी न ठहराया हो, तो मैं तेरे पास धरती भर मग़फ़िरत लेकर आऊँगा।’”
शिर्क से डरना
अल्लाह तआला ने फ़रमाया:
“निश्चय ही अल्लाह इस बात को माफ़ नहीं करता कि उसके साथ किसी को साझी ठहराया जाए, और इसके अतिरिक्त जिसे चाहे माफ़ कर देता है।”
(4:48, 116)
नबी इब्राहीम عليه السلام ने कहा: “और मुझे तथा मेरी संतानों को मूर्तियों की इबादत करने से दूर रखना।”
(14:35)
इब्न मसऊद رضي الله عنه ने रिवायत किया कि नबी मुहम्मद ﷺ ने फ़रमाया:
“जो व्यक्ति इस हाल में मर जाए कि वह अल्लाह के साथ साझी ठहराता था, वह जहन्नम में दाख़िल होगा।”
(अल-बुख़ारी)
इमाम मुस्लिम ने जाबिर رضي الله عنه से रिवायत किया कि अल्लाह के रसूल ﷺ ने फ़रमाया:
“जो व्यक्ति अल्लाह से इस हाल में मिलेगा कि उसने उसके साथ किसी को साझी नहीं ठहराया, वह जन्नत में दाख़िल होगा; और जो व्यक्ति उससे इस हाल में मिलेगा कि उसने किसी भी प्रकार का शिर्क किया होगा, वह जहन्नम में दाख़िल होगा।”
शिर्क के विभिन्न कार्यों की मनाही
नुकसान से बचने या उसे दूर करने के लिए अंगूठी, धागा या इस जैसी कोई चीज़ पहनना शिर्क है
नबी ﷺ से रिवायत है कि उन्होंने फ़रमाया: “जिसने तावीज़ लटकाया, उसने शिर्क किया।”
पेड़, पत्थर या इसी जैसी किसी चीज़ से बरकत हासिल करने की कोशिश करना
अल्लाह, जो सबसे बुलंद है, ने फ़रमाया:
“तो क्या तुमने लात और उज़्ज़ा को देखा? और तीसरी एक अन्य मनात को?”
(53:19–20)
अल्लाह के अतिरिक्त किसी और के लिए ज़बह करना
अल्लाह तआला ने फ़रमाया:
“कह दीजिए: निश्चय ही मेरी नमाज़, मेरी क़ुर्बानी, मेरा जीवन और मेरी मृत्यु सब अल्लाह के लिए हैं, जो सारे संसारों का रब है। उसका कोई साझी नहीं। मुझे इसी का आदेश दिया गया है और मैं सबसे पहले आज्ञाकारी मुसलमानों में से हूँ।”
(6:162–163)
इमाम अहमद ने रिवायत किया कि तारिक़ बिन शिहाब رضي الله عنه ने बताया कि अल्लाह के रसूल ﷺ ने फ़रमाया:
“एक व्यक्ति मक्खी की वजह से जन्नत में दाख़िल हुआ और एक व्यक्ति मक्खी की वजह से जहन्नम में दाख़िल हुआ।” सहाबा ने पूछा: “ऐ अल्लाह के रसूल! यह कैसे हुआ?” आपने फ़रमाया: “दो व्यक्ति ऐसे लोगों के पास से गुज़रे जिनके पास एक मूर्ति थी। वे किसी को वहाँ से गुज़रने नहीं देते थे, जब तक कि वह उसके लिए क़ुर्बानी न करे। उन्होंने उनमें से एक व्यक्ति से क़ुर्बानी करने को कहा। उसने कहा: ‘मेरे पास पेश करने के लिए कुछ नहीं है।’ उन्होंने कहा: ‘कुछ तो क़ुर्बान करो, चाहे मक्खी ही क्यों न हो।’ अतः उसने उनकी मूर्ति के लिए एक मक्खी क़ुर्बान कर दी। उन्होंने उसे रास्ता दे दिया और वह जहन्नम में दाख़िल हुआ। फिर उन्होंने दूसरे व्यक्ति से कहा: ‘कुछ क़ुर्बान करो।’ उसने कहा: ‘मैं अल्लाह के अतिरिक्त किसी के लिए कुछ भी क़ुर्बान नहीं करूँगा, जो अत्यंत महान और प्रतापी है।’ इस पर उन्होंने उसकी गर्दन मार दी और उसे क़त्ल कर दिया, इसलिए वह जन्नत में दाख़िल हुआ।”
(इमाम अहमद)
अल्लाह के अतिरिक्त किसी और के नाम की मन्नत मानना शिर्क है।
अल्लाह के अतिरिक्त किसी और से पनाह माँगना शिर्क का एक प्रकार है।
अल्लाह के अतिरिक्त किसी और से फ़रियाद या मदद माँगना (इस्तिग़ासह), अथवा उसके अतिरिक्त किसी और को पुकारना, शिर्क है।
काहिनों और उनके जैसे लोगों के बारे में
नबी ﷺ ने फ़रमाया:
“जो व्यक्ति किसी काहिन के पास जाए और उसकी बातों को सच माने, उसने मुहम्मद ﷺ पर उतारी गई वह़्य (अर्थात् क़ुरआन) का इनकार किया।”
(अबू दाऊद)
और अल्लाह सबसे बेहतर जानता है। सारी प्रशंसा और शुक्र अल्लाह के लिए है, जो सारे संसारों का रब है। हमारे नबी मुहम्मद ﷺ, उनके अनुयायियों और सभी सहाबा पर अल्लाह की रहमतें और सलाम नाज़िल हों।